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A Bunch Of Roses


Sparklingly special, ah! the aroma u possesses
Oh dear u are a bunch of roses

Roses are white, roses are red
Luv is wat, in all shapes, u like to shed

Dusky are the hearts, dirty the minds
You force them be kind, be kind!

Overnight I ponder,
That u are such a wonder

Dawn so far, a creepy night still to go
People do care for others, but they won’t show

You are always there, makin a difference
If one wants to know life, u are a reference

Every second person will be writing poems for u
But I am Nakul so I want to do something new

You just be u, n I will be always there for u
You be the roses n I would be spines for u
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©Nakul Chaturvedi, 20 Feb. 2007

Comments

Annusah said…
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Random Serious

1) कुर्बत में बेवाफ़ाई, फुर्कत में वफ़ा ढ़ूढंता हूं दुनिया मे कैद, खुद से रिहाई ढ़ूढंता हूं ©️ नकुल चतुर्वेदी, जुलाई 29, 2022 2) मुज़्दा की खोज में हूं कई उम्रों से, उब मुकम्मिल ना होने के डर से डर लगना बंद हो गया (- नकुल) ईऋते खत्र है दरिया में फना हो जाना, दर्द का हद से गुज़रना है दवा हो जाना (- ग़ालिब) ©️ नकुल चतुर्वेदी, जुलाई 29, 2022

कुछ और ही

मुझे ज़िन्दगी से कुछ चाहिए था, ज़िन्दगी को मुझसे कुछ और  मैंने ताक पे सब रख हर बार दिल की सुनी, दिल ने हर बार कहा कुछ और बड़ी तेज़ी से मैंने सब्र की हर रात चुनी, सेहेर को बेताबी थी कुछ और मेरे तो अल्फ़ाज़ों तक ने साथ न दिया, कमबख्तों ने माइने बने कुछ और किरदार को अपने ढ़ाला मुत'अद्दिद (several) रंगों में, गदार को ज़िन्दगी से चाहिए था कुछ और सुन सुन के लोगों की मै सुन ना सका, जब तुमने मुझसे कहा कुछ और तुमने क्यों न सुना जो मैं कह न सका, क़ुव्वत-ए-फ़िक्र न गिला तुमसे है कुछ और मोहोब्बत कम कर न सका, ग़ैर-जानिबदार  (impartial) बन ना सका पन्नो पे पन्ने भरता रहा, रम्ज़-ओ-ईमा   (riddle and hint)   तक कर ना सका तू होता तो ज़िन्दगी के माइने होते कुछ और,  हैं अभी भी पर हैं कुछ और तू होता तो ज़िंदगानी होती कुछ और ©️ नकुल चतुर्वेदी, June 18, 2021 

विरह

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