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एक तरफ़ा

ठीक ही था जो एक तरफ़ा था

रिलेशनशिप स्टेटस होता तोह खाम-ऐ-खां का जश्न हो जाता

ये खूब रहा जो एक तरफ़ा था
इंस्टा स्टोरी होता 24 घंटो में फन्ना हो जाता

हयात का हिस्सा नहीं किस्सा ही सही, एक तरफ़ा था
अनजाने अपडेट की तरह दीवारों पे खो जाता

मेरी तरफ से था, एक तरफ़ा था
मेमोरी अपडेट के तौर पे साल दर साल आया पर कभी शेयर न हुआ

ठीक ही था एक तरफ़ा था
तकरार की वजह ना बना
ठीक ही था एक तरफ़ा था
असरार की तरह, मैसेज बॉक्स में रहा

बेइंतेहा फरहात का सबब रहा जो एक तरफ़ा रहा
मजबूर होके वह मिलने आते तो कस्टमरी चेक इन का बोझ पढ़ जाता

इत्मीनान है कि वह आज भी गुमान करते है
चलो जब तलक हमारी एक ही प्रोफाइल के बारे में पता रहे, ये भी चलता रहे...



© नकुल चतुर्वेदी, 8 may, 2022 

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Random Serious

1) कुर्बत में बेवाफ़ाई, फुर्कत में वफ़ा ढ़ूढंता हूं दुनिया मे कैद, खुद से रिहाई ढ़ूढंता हूं ©️ नकुल चतुर्वेदी, जुलाई 29, 2022 2) मुज़्दा की खोज में हूं कई उम्रों से, उब मुकम्मिल ना होने के डर से डर लगना बंद हो गया (- नकुल) ईऋते खत्र है दरिया में फना हो जाना, दर्द का हद से गुज़रना है दवा हो जाना (- ग़ालिब) ©️ नकुल चतुर्वेदी, जुलाई 29, 2022

कुछ और ही

मुझे ज़िन्दगी से कुछ चाहिए था, ज़िन्दगी को मुझसे कुछ और  मैंने ताक पे सब रख हर बार दिल की सुनी, दिल ने हर बार कहा कुछ और बड़ी तेज़ी से मैंने सब्र की हर रात चुनी, सेहेर को बेताबी थी कुछ और मेरे तो अल्फ़ाज़ों तक ने साथ न दिया, कमबख्तों ने माइने बने कुछ और किरदार को अपने ढ़ाला मुत'अद्दिद (several) रंगों में, गदार को ज़िन्दगी से चाहिए था कुछ और सुन सुन के लोगों की मै सुन ना सका, जब तुमने मुझसे कहा कुछ और तुमने क्यों न सुना जो मैं कह न सका, क़ुव्वत-ए-फ़िक्र न गिला तुमसे है कुछ और मोहोब्बत कम कर न सका, ग़ैर-जानिबदार  (impartial) बन ना सका पन्नो पे पन्ने भरता रहा, रम्ज़-ओ-ईमा   (riddle and hint)   तक कर ना सका तू होता तो ज़िन्दगी के माइने होते कुछ और,  हैं अभी भी पर हैं कुछ और तू होता तो ज़िंदगानी होती कुछ और ©️ नकुल चतुर्वेदी, June 18, 2021 

विरह

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